दो पल के जीवन से, इक उम्र चुरानी है

यूं कभी बारिश की बूंदों में बेफिक्री भीगना,
हथेलियों से आसमां की रोशनी को मुट्ठियों में सहेज लाने की एक नाकाम-सी कोशिश, 
दोस्तों संग यादें बनाना,
कुछ अतरंगी शरारतें,
मन को प्रफुल्लित करती हैं ना।!?!! 

इन शैतानियों में हम दिमाग कम,
और दिल ज़्यादा लगा लेते हैं।
हां, बेशक फिर से बच्चे तो नहीं बन सकते, लेकिन इस समझदारी के दहलीज से दो पल की मासूमियत तो चुरा ही सकते हैं यार!!!

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