शून्य
ये रफ्तार-सी दुनिया ,
ना खुद कभी ठहरती ,
और ना हमें ठहरने देती है।
इसकी लहरो में गोते लगाने की ,
बेशुमार आदत सी जो हो गई है ,
जब तक खुशी या गम के
थपेड़े ना खा लें ,
ऐसा लगता ही नहीं कि
इस दुनिया का हिस्सा भी हैं।
लेकिन कितना सुकून देता है ना।?
इस रफ्तार में ,
कभी यूं ही खुद को थाम लेना , थोड़ा ठहर जाना ,थोड़ा खुद से खुद की बात करना ,
खुशी-गम से परे ,
बिल्कुल निश्चल मन से खुद की अंतरात्मा में झांकना।
कभी ठहर के देखिएगा ज़रूर! जिंदगी के अलग नज़राने मिलेंगे...।
#शुन्य #सुकून #निश्चलमन

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